10 दिन में काली मिर्च 80 रुपये किलोग्राम तक महंगी

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चेन्नई। पिछले 10 दिनों में काली मिर्च के दाम 80 रुपये तक चढ़ चुके हैं। किसानों का कहना है कि इतिहास में पहली बार कीमतों में इतनी मजबूती आई है। कीमतों में इस इजाफे का श्रेय मुख्य रूप से आयातित काली मिर्च पर न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) को जाता है। इस महीने की शुरुआत में एमआईपी की घोषणा की गई थी।

इस घोषणा के बाद घरेलू काली मिर्च के दाम 10-12 प्रतिशत तक बढ़कर 420 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ चुके हैं। केपीए के पूर्व कार्यकारी समिति सदस्य और कर्नाटक क्षेत्र के प्रमुख उत्पादक रोहन कोलैको कहते हैं कि आज ज्यादातर हाजिर बाजारों में काली मिर्च के दाम 500 रुपये प्रति किलोग्राम बोले जा रहे हैं।

एमआईपी के बाद दो हफ्ते की अवधि में कीमतों में यह उछाल बहुत तेजी से आई है। उस वक्त दाम 380 रुपये पर बोले जा रहे थे। बाजार में मांग अच्छी है और आपूर्ति कम लग रही है क्योंकि किसान अपनी उपज बेचने के इच्छुक नहीं है, उन्हें दाम 600 रुपये प्रति किलोग्राम का स्तर छूने की उम्मीद है।

कोलैको ने कहा कि तकरीबन 50-60 प्रतिशत किसान पहले ही उपज बेच चुके हैं और बाकी को इस उम्मीद से रोक लिया गया है कि दाम और बढ़ेंगे। पूर्व में आयात की वजह से काली मिर्च के दाम लगभग 600 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर करीब 380 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए थे।

हालांकि आयातित काली मिर्च की गुणवत्ता कम थी। काली मिर्च के किसानों के हितों की रक्षा के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने काली मिर्च पर एमआईपी के रूप में प्रति किलोग्राम 500 रुपये मूल्य का सीआईएफ (लागत, बीमा, भाड़ा) निर्धारित करने का मसाला बोर्ड का प्रस्ताव मंजूर कर लिया।

केरल के एक किसान ने कहा कि हाल के समय में दूसरे देशों से सस्ते आयात की वजह से घरेलू काली मिर्च के दामों में गिरावट आना काली मिर्च के किसानों के बीच प्रमुख चिंता का विषय रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि काली मिर्च के दाम एक साल में करीब 35 प्रतिशत तक गिर चुके हैं और इसके परिणामस्वरूप काली मिर्च के किसानों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।
 
केरल के एक किसान ने कहा कि कॉफी के दामों में गिरावट को काली मिर्च की अच्छी आमदनी से सहारा मिला था, लेकिन काली मिर्च के दामों में 50 प्रतिशत तक की गिरावट से भविष्य अंधकारमय दिखता है। कोलैको का कहना है कि इससे किसानों पर काफी दबाव आ गया है।

मौजूदा रुख देखकर किसानों ने काली मिर्च की बिक्री रोक ली है। अब और आने वाली उपज के सीजन में उन्हें 600 रुपये प्रति किलोग्राम दाम की उम्मीद है। किसी भी भागीदार के स्टॉक न निकालने की वजह से विक्रेताओं के लिए बाजार काफी फायदेमंद नजर आ रहा है। 
 
भारत की काली मिर्च की सालाना मांग में करीब चार प्रतिशत का इजाफा हो रहा है। वर्तमान में 60,000 टन प्रति वर्ष मांग होने का अनुमान है। बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले सीजन में वियतनाम का अपेक्षित काली मिर्च उत्पादन 1,70,000-1,90,000 टन रहने का अनुमान जताया गया है, जबकि भारत के लिए यह अनुमान 65,000-70,000 टन है।