डाटा स्पीड 1000 गुना ज्यादा, मोबाइल बैटरी खपत होगी 10 गुना कम

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रायपुर। वर्तमान में हम 4जी यूज करते हैं और सोचते हैं कि कितनी अच्छा स्पीड है, लेकिन आने वाले समय में ये स्पीड भी कम लगने वाली है, क्योंकि आने वाले दिनों में सब कुछ इंटरनेट से जुड़ा होगा और इंटरनेट से ही संचालित होगा। तब 4जी लोगों के डाटा स्पीड की मांग को पूरा नहीं कर पाएगी और देशभर में अधिक डेटा स्पीड की मांग होने लगेगी।

इस मांग को ध्यान में रखते हुए एनआईटी के पीएचडी स्कॉलर डॉ. पवन कुमार मिश्रा ने अपने पीएचडी शोध के माध्यम से 5जी नेटवर्क्स का एनालिसिस करके उसके मापदंडों में वृद्धि की है। इससे डाटा स्पीड 4जी की अपेक्षा 1000 गुना ज्यादा और बैटरी की खपत भी 10 गुना तक कम हो सकेगी।

उन्होंने अपने रिसर्च ‘द एनालिसिस एंड एनहासमेंट ऑफ क्वालिटी ऑफ सर्विस पैरामीटर्स फॉर 5जी नेटवर्क्स’ विषय पर किया है। यह शोध कार्य उन्होंने डॉ. सुधाकर पांडेय और डॉ. संजय कुमार विश्वास के मार्गदर्शन में किया गया है, जिसमें उन्होंने 5जी नेटवर्क्स के क्वालिटी और सर्विस पैरामीटर्स पर काम किया है।

डाटा स्पीड बढ़ेगी : डॉ. पवन ने बताया कि जब डाटा स्पीड में वृद्धि और टावरों की संख्या में वृद्धि होगी तो इसका असर बैटरी पर भी पड़ेगा। बैटरी खपत 10 गुना तक कम हो जाएगी, क्योंकि 5जी से टॉवरों की संख्या में वृद्धि होने से हर क्षेत्र में बेहतर कनेक्टीविटी मिलेगी, जिससे मोबाइल में आसानी से नेटवर्क प्राप्त होगा।

ये कम इस लिए भी होंगे, क्योंकि अभी टावर बहुत दूर दूर है। इससे कारण कनेक्टीविटी में प्राब्लम आती है और मोबाइल को काफी मेहनत करना पड़ता है। इसके कारण बैटरी जल्दी-जल्दी खत्म होता है। जो उसे समय अधिक टावरों या कनेक्टीविटी के कारण नहीं होगा।

मांग को देखते हुए किया काम : उन्होंने बताया आने वाले दिनों में डाटा की मांग को ध्यान में रखते हुए इसके लिए 5जी आर्किटेक्चर मॉडल पर काम किया गया, जिसके माध्यम से 5जी के उसके सर्विस मापदंडों की वृद्धि की जा सकती है। रिसर्च में कई प्रकार के नई-नई टेक्नीक्स का उपयोग करके काम किया गया है।

जिसके फायदे को देखते हुए शोध के दौरान किए गए कार्य को अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जनरल और कॉन्फ्रेंस में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके फायदे यह होंगे कि डाटा किमत अभी के अपेक्षा बहुत कम हो जाएगा, जिससे हर र्व्यक्ति इसका उपयोग कर सकेगा। साथ ही गांव-गांव तक इंटरनेट सर्विस पहुंच जाएंगे। रिसर्च का उपयोग हर क्षेत्र में किया जा सकता है।