स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को मिलेगा आर्थिक सम्बल

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कोटा में अमृता हाट का शुभारंभ, महिला समूहों द्वारा विभिन्न घरेलू उत्पादों का प्रदर्शन एवं विपणन किया 

जयपुर। कोटा में संभागीय स्तरीय अमृता हाट मेले का शुभारंभ शुक्रवार को कृषि मंत्री तथा कोटा जिला प्रभारी मंत्री डॉ. प्रभुलाल सैनी के द्वारा ग्रामीण हाट बाजार में किया गया। इस अवसर पर सांसद ओम बिरला, विधायक  हीरा लाल नागर, अध्यक्ष यूआईटी  रामकुमार मेहता, जिला कलक्टर  रोहित गुप्ता भी उपस्थित रहे। 

पांच दिवसीय अमृता हाट आयोजन में प्रदेश भर के महिला समूहों द्वारा विभिन्न घरेलू उत्पादों का प्रदर्शन एवं विपणन किया जायेगा। इस अवसर पर जिला प्रभारी मंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक सम्बल प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि महिला समूहों द्वारा तैयार किये गये उत्पाद गुणवत्ता पूर्ण होने के साथ-साथ उचित दरों पर भी मिलते हैं। अमृता हाट जैसे आयोजनों से महिला समूहों एवं आम उपभोक्ताओं को भी लाभ मिलता है। सांसद ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक उत्थान हेतु समूह गठन कर उन्हें सम्बल प्रदान करते हुए इस प्रकार के मेले आयोजन महत्वपूर्ण साबित होते हैं। 

सहायक निदेशक महिला अधिकारिता युगल किशोर मीणा ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों के हुनर विकास हेतु उन्हें कौशल विकास के विविध प्रशिक्षण सरकार द्वारा निरन्तर प्रदान किए जा रहे हैं।

इसके पश्चात् इनके द्वारा निर्मित उत्पादों को मार्केट प्रदान करके महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण के अधिकतम अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य में आयोजित हो रहे ‘‘राष्ट्रीय अमृता हाट‘‘ के क्षेत्र को विस्तृत कर इसका आयोजन वर्ष 2015-16 में राज्य के सभी संभागों में किया गया।

वर्ष 2016-17 में सभी संभागों के अलावा 8 जिलों में भी अमृता हाट का आयोजन किया गया। इस वित्तीय वर्ष में एक राष्ट्रीय, 6 संभागीय व 15 जिला स्तरीय अर्थात् कुल 22 अमृता हाट आयोजित किए जाएंगे। इससे महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी महिलाओं के हुनर को स्थानीय स्तर पर भी मार्केटिंग के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। 

विभाग की प्रतिनिधि राजकुमार हाडा ने बताया कि अमृता हाट में भाग लेने वाली स्वयं सहायता समूह सदस्य महिलाओं को राज्य सरकार द्वारा निःशुल्क स्टॉल्स, भोजन, आवास के साथ-साथ आने-जाने का वास्तविक किराया भी दिया जाता है।

अमृता हाट में भाग लेने वाले समूहों की महिलाओं को हाट के दौरान ही खाली समय में सरकारी योजनाओं की जानकारी, महिलाओं से जुड़े एक्ट एण्ड रूल्स की जानकारी, उनके स्वास्थ्य संबंधी जागृति आदि के लिए सत्र/ संगोष्ठी आदि का आयोजन किया जाता है।

वहीं मनोरंजन के लिए घूमर, कठपूतली, कच्ची घोड़ी, तेरहताली, चकरी, भवई आदि लोकनृत्य के अलावा लोक गायन एवं मेंहदी, रंगोली, पोस्टर पेंटिंग, प्रश्नोत्तरी आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाता है। अमृता हाट के आयोजन के पूर्व व मध्य में प्रचार-प्रसार का ध्यान रखा जाता है ताकि हाट में अधिक से अधिक फुटफॉल हो एवं समूह अपने सामान की अच्छी बिक्री कर सकें।

इनकी लगी है प्रदर्शनी
अमृता हाट में राज्य के विविध जिलों के समूहों के उत्पादों में कोटा डोरिया, टाई एण्ड डाई, बगरू प्रिंट, बंधेज, गोटापत्ती वर्क की साडियां व सूट्स, दुपट्टे स्टॉल्स पेचवर्क, सांगानेरी व बगरू प्रिंट, जैसलमेरी-बाडमेरी कढाई की चद्दरें व कुशन कवर्स व बैड कवर्स, हैण्ड बैग्स, डिजाइनर साडियां, सूट्स, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, सिक्के की ज्वैलरी, लाख की चूडियां, मोजडी, ब्ल्यू पोटरी, पेपरमेशी, कॉनवर्क, कठपुतलियां, ऊन के खिलौने, दरियां, खेस, भगवान की पोशाक, टेराकोटा व मोलेला उत्पाद, हैण्डमेड पेपर प्रोडक्ट्स, खाघ्य पदार्थ जैसे पापड, मंगोडी, अचार, मसाले, राबोडी, मठरी, नमकीन, मीठी सेव, चिप्स, आम-पापड, खांखरे, तिलपट्टी आदि प्रमुख है।