‘दवा’ से ज्यादा असर दिखाती है ईश्वर की ‘दया’: संत नागरजी

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धर्मसभा : बरसात के अगले दिन हजारों श्रद्धालुओं ने बड़ा के बालाजी धाम में भक्ति सागर का आनंद उठाया

अरविंद, बारां/कोटा। पूज्य गौसेवक संत पंडित कमल किशोर ‘नागरजी’ ने कहा कि देह में कोई बीमारी हो तो उसका इलाज डॉक्टर के पास है लेकिन मन की दवा तो केवल ईश्वर के पास है।

बारां के पास बड़ा के बालाजी धाम में गुरुवार को श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ सोपान में उन्होंने कहा कि बीमारी होने पर हम होम्योपैथी या एलोपैथी डॉक्टर से अलग-अलग इलाज लेते है लेकिन मन मे कोई पीड़ा हो तो प्रभू की शरण में जाने से रुक जातेे हैं।

सनातन धर्म मे ऐसी कथाओं में ज्ञान गंगा बहती है, समय निकालकर भक्ति प्रवाह में मन लगाओ। हो सकता है कथा सुनते समय हमारे मन की कोई बात निकलकर बाहर आ जाये और मन को हल्का कर दे।

उन्होंने कहा कि आज हम संसार की खाई में उलझे हुए हैं। एक इधर तो दूसरा उधर खींचता है। तैराक कितना भी अच्छा हो, वो जल में मछली को नही पकड़ पाता है, उसी तरह माया के सागर में फंसकर भक्ति-भाव हमसे दूर होते जाते हैं।

भवसागर से पार होना है तो नित्यकर्म से समय निकालकर भक्ति की नौका में सवार हो जाओ। क्योकि ऐसे स्थान पर आकर हम भय से अभय हो जाते हैं।

यहां दवा की जगह प्रभु की दया दृष्टि बरसती है। फिर भी कोई अड़चन आये तो समझ लेना कि मेरे जीवन की डोर प्रभु के हाथ मे नही है। मन मे उसे निरन्तर भजते रहें, बाधाएं अवश्य हट जाएंगी।

भेदभाव मिटाती है कुंकुम व सिंदूर
अपने धाराप्रवाह प्रवचन में पूज्य नागरजी ने महिलाओं से कहा कि कलियुग में पति के साथ होने पर भी नारी मांग में सिंदूर लगाने में संकोच करती है।

सनातन धर्म मे जनेऊ, धोती, तिलक, कुंकुम व सिंदूर का बड़ा सम्मान है। नारी सुहागन है, यदि वो पतिव्रता रहे तो देवी रूप के समान है। हमारे यहां कुंकुम और सिंदूर हमेशा समानता लाती है।

क्योकि अमीर या गरीब सभी इसे समान भाव से लगाते हैं। सोने-चांदी के जेवर में एक बार भेदभाव हो सकता है पर सिंदूर में नहीं। ये सौभाग्य की सूचक है। नारी की मांग में सिंदूर दिखता है, तो ईश्वर की दया दृष्टि उस पर बनी रहती है।

एक प्रसंग में उन्होंने कहा कि सीताहरण के बाद श्रीराम ने रावण से समझौते के लिए हनुमान को भेजा, तब लक्ष्मण-जामवंत ने लंका को मिटाने की बात कही। इस पर श्रीराम बोले- मिटा देते लेकिन मंदोदरी की मांग में सिंदूर है, उसे नही मिटा सकते।

खूब पढ़ो, आगे बढ़ो लेकिन..
पूज्य नागरजी ने बच्चों और युवाओं से कहा कि खूब पढ़ो, आगे बढ़ो लेकिन किसी से मिलने पर हाय-हैलो कहना छोडकर जय श्रीराम या जय श्रीकृष्ण कहना शुरू कर दो। आपको केवल ईश्वर जब नाम से ही आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने लगेगी।

विराट कथा पांडाल में गुरुवार को धूमधाम से भव्य कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। देर तक सभी श्रद्धालु मधुर भजनों पर झूमते रहे। दम्पती पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया, उर्मिला भाया एवं पुत्र यश ने हजारों श्रद्धालुओं के साथ सामूहिक भागवत आरती की।