सहकारी समितियां नाम के साथ ‘बैंक’ न जोड़ें : आरबीआई

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RBI की आम लोगों से भी सहकारी समितियों से कामकाज में सतर्कता बरतने की अपील 

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने कोऑपरेटिव सोसायटी यानी सहकारी समितियों को निर्देश दिया है कि वे अपने नाम के साथ बैंक शब्द का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि यह बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के विरुद्ध है।

एक बयान में रिजर्व बैंक ने कहा कि उसे यह भी जानकारी मिली है कि राजस्थान के कोटा ,जयपुर और जोधपुर समेत कई शहरों कुछ सहकारी समितियां आम लोगों से जमा स्वीकार कर रही हैं। कानून के प्रावधानों के मुताबिक यह बैंकिंग कारोबार के दायरे में आता है, इस वजह से यह करना नियमों का उल्लंघन है।

बयान के अनुसार इन समितियों को बैंक का कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है। RBI ने उन्हें बैंकिंग व्यवसाय के लिए अधिकृत भी नहीं किया है। समितियों में जमा राशि पर लोगों को डीआइसीजीसी की बीमा सुरक्षा भी नहीं मिलेगी।

रिजर्व बैंक ने आम लोगों से भी सहकारी समितियों से कामकाज में सतर्कता बरतने की अपील की है। समितियों के साथ बैंकों की तरह लेनदेन नहीं किया जाना चाहिए। सरकारी समितियां बैंक की तरह पैसा जमा नहीं कर सकती हैं।

आरबीआई ने कम किया नए नोटों की छपाई का ऑर्डर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने नए नोटों की छपाई के ऑर्डर में कटौती कर दी है। यह कटौती बीते पांच वर्षों में सबसे कम है। इसका कारण करेंसी चेस्ट में पर्याप्त जगह न होना है।

यह जानकारी एक मीडिया रिपोर्ट के जरिए सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरबीआई के करेंसी चेस्ट और कॉमर्शियल बैंकों में जगह न होने का मुख्य कारण बीते वर्ष देश में नोटबंदी के बाद पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करना है। ये पुराने नोट इन करेंसी चेस्ट में पहले से पड़े हैं।