कोटा के बाघप्रेमियों ने सरिस्का परियोजना विस्थापन का लिया जायजा

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मुकंदरा में बाघ पुनर्वास से पूर्व सरिस्का के अनुभव पर व्यापक अध्ययन शुरू

कोटा। कोटा के मुकंदरा टाईगर रिजर्व में बाघ बसाने की सरकार की योजना के क्रम में कोटा के बाघप्रेमियों के दल ने गत दिनों अलवर के सरिस्का बाघ परियोजना के ग्रामीणों के पुनर्वास का जायजा लिया ।

राष्ट्रीय जल बिरादरी के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश विजयवर्गीय, सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ हिस्टोरिकल ईकोलॉजिकल रिसोर्स (शेर) के डॉ. कृष्णेंद्र सिंह, भरत कुमार,प्रवीण कुमार सिंह, एवं पूर्व वन्यजीव प्रतिपालक विट्ठल कुमार सनाढ्य ने सरिस्का के जगलों में वन्यजीवों की मौजूदगी विशेषकर बाघों के पुनर्वास,वनस्पतियों, जल स्त्रोतों और बाघ के स्वतंत्र विचरण में बाधाओं संबंधी समस्याओं और ग्रामीणों के पुनर्वास पैकेज सरकारी व्यवस्था का तथ्यपरक अध्ययन किया।

मुकंदरा में बाघ पुनर्वास से पूर्व सरिस्का के अनुभव पर अध्ययन करती टीम.

ग्राम हरिपुरा के निवासियों से विस्थापन संबंधी अनुभव सांझा किए। अलवर जिले में तरूण भारत संघ के कार्यक्षैत्र गोपालपुरा, भीकम पुरा ,भगाणी तिलदेही के ग्रामीणों से संवाद और वन विभाग से मधुर संबंधों से अंततोगत्वा जिसका सीधा लाभ बाघों को होता है और गांवों को भी। गांवों को विस्थापक का सम्मानजनक पैकेज मिलने पर ग्रामीण स्वयं वनों से दूर जाने को तैयार है।

कोटा के मुकंदरा की परिधि के गांवों के विचार साझा कर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी जिससे तुलनात्मक अध्ययन में मदद मिल सके। विजयवर्गीय ने बताया कि बाघ प्रेमियों का दल ही रणथम्भौर बाघ परियोजना के गांवों के विस्थापन का भी अध्ययन करेगा।