जेईई मेन्स की पात्रता के लिए सभी विषयों में नहीं देना होगा इंप्रूवमेंट एग्जाम

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यह नियम उन स्टूडेंट्स पर लागू होगा जो बोर्ड के प्रतिशत के आधार पर क्वालीफाई करना चाहते हैं

कोटा। जेईई मेन्स की पात्रता हासिल करने के लिए इंप्रूवमेंट एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स को सभी पेपर नहीं देने होंगे। यह नियम उन स्टूडेंट्स पर लागू होगा, जो बोर्ड के प्रतिशत के आधार पर क्वालीफाई करना चाहते हैं। टॉप 20 पर्सेंटाइल के आधार पर क्वालीफाई करने के लिए अभी भी सभी पेपर देने होंगे।

सीबीएसई मेन्स यूनिट की ओर से जारी इनफॉरमेशन बुलेटिन के बाद अब ये संशय दूर हो गया है। जेईई मेन्स क्लियर करने के बाद इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए बोर्ड में सामान्य वर्ग में 75 प्रतिशत कैटेगरी में 65 प्रतिशत अंक या फिर बोर्ड के टॉप 20 पर्सेंटाइल में आना अनिवार्य है।

उधर, सीबीएसई ने अब एग्जाम से संबंधित एफएक्यू भी जारी कर दिया है। इसमें बताया गया है कि जिन स्टूडेंट्स का आधार कार्ड नहीं बना है या जिनके कार्ड में स्टूडेंट का नाम बोर्ड की अंकतालिका में जन्म तिथि नहीं है तो उनको 14 डिजिट के एनरोलमेंट नंबर से आवेदन करने का विकल्प दिया जाएगा।

ऐसे स्टूडेंट्स जिनके माता-पिता का नाम अंकतालिका के अनुसार नहीं है तो वे अपने माता-पिता का नाम अंकतालिका के अनुरूप ही भरें। असम, जम्मू कश्मीर मेघालय से 12वीं पास स्टूडेंट्स पासपोर्ट नंबर अन्य सरकारी पहचान पत्र के नंबर से फॉर्म भर सकते हैं।

कनफर्मेशन की आवश्यकता नहीं
कॅरियर काउंसलर अमित आहूजा ने बताया कि स्टूडेंट्स को आवेदन में मेन्स की साइट पर लॉग इन करके अपना नाम, जन्म तारीख, आधार नंबर, स्टेट कोड ऑफ एलिजिबिलिटी आदि भरने होंगे। इन जानकारियों को आधार कार्ड से मिलाया जाएगा। इसके बाद फोटो, साइन और माता-पिता के साइन को स्कैन करके अपलोड करना होगा।

इसके बाद परीक्षा शुल्क का भुगतान करके कनफर्मेशन पेज का प्रिंट आउट निकाल सकेंगे। इस पेज को जेईई ऑफिस भेजने की आवश्यकता नहीं है।

विदेशी सेंटर पर देना होगा 684 रुपए का जीएसटी
एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि अगर कोई छात्र विदेशी सेंटर पर मेन्स का एग्जाम देता है तो उसको जीएसटी के रूप में 684 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। उसकी कुल फीस 4484 रुपए होगी। भारत में दोनों पेपर ऑफलाइन मोड पर देने पर 324 रुपए जीएसटी समेत  कुल फीस 2124 रुपए होगी। ऑनलाइन पेमेंट पर 1 प्रतिशत प्रोसेसिंग चार्ज भी देना होगा।

जेईई मेन्स में भाग लेने वाले राज्यों में राजस्थान का नाम नहीं
आरटीयू की ओर से इस साल भी जेईई मेन्स यूनिट से कोआर्डिनेशन नहीं करने से राजस्थान को इस परीक्षा में भाग लेने वाले राज्यों की सूची में शामिल नहीं किया है। हर साल यूनिवर्सिटी एडमिशन के संबंध में देरी से नोटिफिकेशन जारी कर रही है। मेन्स के फाॅर्म फिलिंग समाप्त होने से पहले ही यह नोटिफिकेशन जारी किया जाता है।

इस कारण स्टूडेंट्स को फॉर्म फिलिंग और परीक्षा की तैयारियाें के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। इस साल भी आरटीयू ने यही गलती दोहराई और सीबीएसई मेन्स यूनिट से संपर्क नहीं किया। मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, नागालैंड और ओडिसा राज्य सीधे मेन्स में भाग ले रहे हैं।

आरटीयू के वीसी प्रो. एनपी कौशिक ने बताया कि इस साल एडमिशन एजेंसी बदल दी गई है। एजेंसी से कोआर्डिनेट करके कहा जाएगा कि वह बच्चों के लिए पहले ही जेईई मेन्स में बैठने की सूचना कर दें।

मेन्स के नोटिफिकेशन में आने से साफ होती थी स्थिति
राजस्थानका नाम अगर जेईई मेन्स के नोटिफिकेशन में आता तो स्टूडेंट्स अपनी तैयारियां शुरू कर देते। उन्हें तैयारियों के लिए करीब साढ़े पांच माह का समय मिल जाता है।

आरटीयू अमूमन दिसंबर अंत तक ही नोटिफिकेशन जारी करके मेन्स के आधार पर एडमिशन की सूचना जारी करता है।ऐसे में एक माह का नुकसान उनको होता है। वहीं ऑनलाइन फाॅर्म फिलिंग प्रक्रिया में भी उनको काफी समय लग जाता है। मेन्स के नोटिफिकेशन में ही राजस्थान का नाम आने से सभी अटकलों पर विराम लग जाता।