कन्ज्यूमर्स पर बोझ डालने की जुगत में जुटे रेस्तरां मालिक!

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नई दिल्ली/गुवाहाटी। जीएसटी (गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स) काउंसिल ने शुक्रवार को रेस्तरां में खाने पर टैक्स घटा दिया। इसके बाद आपका बिल 5 से 6 पर्सेंट सस्ता हो जाएगा। काउंसिल ने सभी रेस्तरां में खाने पर 18 की जगह 5 पर्सेंट टैक्स लगाने का फैसला किया है।

इस फैसले से 1 करोड़ या उससे ज्यादा रेवेन्यू वाले रेस्तरां इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं ले पाएंगे। जीएसटी काउंसिल का मानना है कि रेस्तरां इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा कन्ज्यूममर्स को पास नहीं कर रहे थे। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘क्योंकि वे कन्ज्यूमर्स को इनपुट टैक्स क्रेडिट का फायदा नहीं दे रहे थे, इसलिए वे भी इस लाभ के अधिकारी नहीं हैं।’

रेस्तरां मालिक काउंसिल के इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस फैसले के बाद मैन्यु प्राइस में 6 पर्सेंट का इजाफा हो सकता है, क्योंकि सरकार ने इनपुट टैक्स क्रेडिट को वापस ले लिया है।

यदि रेस्तरां मालिकों ने इस बोझ को कन्ज्यूमर्स पर डालने का फैसला किया तो जिस आइटम की कीमत 500 रुपये है, उसके लिए 530 रुपये देने होंगे। वैसे अब तक 18 पर्सेंट की दर से 90 रुपये के टैक्स के मुकाबले अब 500 रुपये के आइटम पर नई दर से टैक्स घटकर 26.50 रुपये हो जाएगा।

इसके बाद कन्ज्यूमर्स को 500 रुपये के आइटम के लिए 590 रुपये की जगह 556.50 रुपये देने होंगे। इसमें 26.50 रुपये टैक्स के अलावा मैन्यु में 6 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है। हालांकि कुछ रेस्तरां मालिक इस फैसले का स्वागत भी कर रहे हैं।

जूबिलेंट फूड वर्क्स के चेयरमैन हरी भाटिया ने बताया कि इस फैसले के बाद कन्ज्यूमर्स के लिए बाहर खाना या बाहर से खाना ऑर्डर करना ज्यादा किफायती हो जाएगा। इसके बाद ऑर्गेनाइज्ड रेस्तरां सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ भी देखने को मिल सकती है। कुछ रेस्तरां मालिकों की इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है।

उनका कहना है कि कन्ज्यूमर्स को इस वजह से थोड़ा फायदा मिल सकता है, लेकिन रेस्तरां मालिकों को इससे कोई फायदा नहीं होने वाला। नैशनल रेस्तरां असोसिएशन ऑफ इंडिया के वाइस चेयरमैन और बीअर कैफे के सीईओ राहुल सिंह ने बताया, ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट का फैसला वापस लेना जीएसटी के बताए गए फायदों के खिलाफ है।

इसके बाद आइटम की कीमत में 10 पर्सेंट तक की बढ़ोतरी हो सकती है, जिसे रेस्तरां कन्ज्यूमर्स को चुकाने के लिए कहेंगे। इसलिए ग्राहकों को इस फैसले का आंशिक लाभ मिल सकता है, लेकिन यह बड़ा फायदा नहीं होगा।’