नोटबंदी के दौरान 35 हजार संदिग्ध कंपनियों ने डिपॉजिट किए 17 हजार करोड़

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सरकार ने खोला फर्जी कंपनियों का कच्चा चिट्ठा

नई दिल्ली। दो साल या उससे अधिक समय से निष्क्रिय रहने वाली 2.24 लाख कंपनियों को बंद कर दिया गया है। कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने रविवार को इसकी जानकारी दी।

बंद की गई 2.24 लाख कंपनियों में से कई कंपनियां संभावित फर्जी (शेल) कंपनियां थीं। सरकार ने इन कंपनियों को 56 बैंकों से मिली जानकारी के आधार पर बंद किया है। बैंकों ने 35 हजार कंपनियों और 58 हजार बैंक खातों की जानकारी मंत्रालय को दी थी।

इन कंपनियों के खिलाफ हुई शुरुआती जांच में यह सामने आया कि पिछले साल हुई नोटबंदी बाद इन 35 हजार कंपनियों ने 17 हजार करोड़ रुपये बैंकों में जमा कराए, जिसे बाद में निकाल लिया गया।

मंत्रालय की ओर से जारी की गई जानकारी में बताया गया कि एक कंपनी के 2,134 बैंक खातों के बारे में पता चला वहीं, एक निगेटिव ऑपनिंग बैलेंस वाली एक कंपनी ने नोटबंदी के बाद 2,484 करोड़ रुपये बैंकों में जमा किए और बाद में निकाल लिए।

सरकार ने बताया कि ऐसी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। ऐसी कंपनियों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं और सरकार की अनुमति के बिना ये कंपनियां अपने ऐसेट्स को बेच या ट्रांसफर नहीं कर सकती हैं। राज्य सरकारों को भी ऐसे ट्रांजैक्शंस के रजिस्ट्रेशन ब्लॉक करने की सलाह केंद्र सरकार की ओर से दी गई है।

कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों से वित्तीय विवरण न भरने वाले 3.09 लाख कंपनी बोर्ड डायरेक्टर्स को अयोग्य घोषित कर दिया है। कंपनीज ऐक्ट, 2013 के तहत वित्तीय विवरण भरना अनिवार्य है।

शुरुआती जांच में यह सामने आया कि अयोग्य घोषित किए गए डायरेक्टर्स में से 3000 डायरेक्टर्स 20 से ज्यादा कंपनियों के बोर्ड डायरेक्टर थे जो कानूनी सीमा से ज्यादा है।

डमी डायरेक्टर्स की समस्या पर लगाम लगाने के लिए नए नियम लागू किए गए हैं। अब नए DIN (डायरेक्टर्स आइडेंटिफिकेशन नंबर) के लिए अप्लाई करते वक्त पैन और आधार कार्ड की बायोमैट्रिक मैचिंग की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने कहा इस कदम के जरिए फर्जी या डमी डायरेक्टर्स पर रोक लगाई जा सकेगी।