RBI ने ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स पर लगाई पाबंदियां

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नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने अत्यधिक फंसे कर्ज (एनपीए) होने की वजह से ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) के खिलाफ त्वरित सुधारात्मक कदम (पीसीए) उठाये हैं। इसके तहत नया कर्ज और लाभांश देने पर प्रतिबंध समेत कई पाबंदियां लगाई गई हैं।

ओबीसी ने रेगुलेटरी फाइलिंग में जानकारी दी है कि आरबीआइ ने ज्यादा एनपीए होने के कारण उसके विरुद्ध त्वरित सुधारात्मक कदम उठाए हैं। हालांकि उसका कहना है कि इस कार्रवाई से उसके प्रदर्शन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। वह जोखिम प्रबंधन, एसेट क्वालिटी, लाभप्रदता और कार्यकुशलता में सुधार के लिए प्रयास करता रहेगा।

बीते जून में बैंक का एनपीए उसके कुल कर्जो के मुकाबले 9.56 फीसद तक पहुंच गया है। एक साल पहले एनपीए 8.11 फीसद था। आरबीआइ ने आइडीबीआइ बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और यूको बैंक के भी खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई शुरू की है।

आरबीआइ ने अप्रैल में पीसीए में कुछ नये प्रावधान जोड़ते हुए इसके नियम जारी किये थे। इसमें एक प्रावधान यह भी जोड़ा गया कि अगर बैंक की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो या तो उसका विलय कर दिया जाएगा या किसी अन्य बैंक द्वारा अधिग्रहण कर लिया जाएगा।

ओबीसी ने जून में समाप्त तिमाही में 486.20 करोड़ रुपये शुद्ध घाटा होने की जानकारी दी थी। आय में कमी और फंसे कर्जो के लिए ज्यादा पैसा निकालने की वजह से घाटे की स्थिति बनी। बैंक का कुल कर्जो के मुकाबले कुल एनपीए बढ़कर 14.83 फीसद तक पहुंच गया जबकि पिछले साल यह 11.45 फीसद था।

एनपीए ज्यादा होने के कारण उसे जून में समाप्त तिमाही के दौरान 1591.48 करोड़ रुपये निकालने पड़े। पिछले साल उसने 1147.49 करोड़ रुपये निकाले थे। शुक्रवार को ओबीसी का शेयर बीएसई में 1.31 फीसद की तेजी के साथ 123.50 रुपये पर बंद हुआ।