पेट्रोल-डीजल पर अब भी सरकार और ऑइल कंपनीज को भारी मुनाफा

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नई दिल्ली। हाल ही में सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी 2 रुपये कम की है। वित्त मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा थी कि सरकार को इससे सालाना 26,000 करोड़ का घाटा होने की उम्मीद है। अब इस मामले में नई जानकारी सामने आई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कटौती के बाद भी पेट्रोल, ऑइल और लूब्रिकेंट(पीओएल) प्रॉडक्ट्स पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी से सरकार को 2.73 लाख करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। यह अनुमान सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज ऐंड कस्टम्स ने लगाया है।

सरकार को होने वाली यह आय मोदी सरकार के पहले साल यानी 2014-15 की आय से लगभग 3 गुनी है। पिछले साल की आय के मुकाबले इस साल आय में 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है। पिछले सप्ताह यह जानकारी सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज ऐंड कस्टम्स ने एक प्रेजेंटेशन के जरिए सरकार को दी थी।

इंटरनैशनल मार्केट में क्रूड ऑइल की कीमत घटने के बावजूद मोदी सरकार ने अपने 3 साल के कार्यकाल में टैक्स बढ़ाकर ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू अर्जित करने की कोशिश की, जिसके बाद पट्रोल-डीजल बढ़ी कीमतों के कारण सरकार को काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

पिछले 3 साल में पेट्रोल पर लेवी लगभग 12 रुपये और डीजल पर 13 रुपये से ज्यादा बढ़ी है। सूत्रों के अनुसार कीमतें घटने के बाद भी इन प्रॉडक्ट्स पर सरकार ने कुछ इस तरह टैक्स बढ़ाया कि क्रूड ऑइल की कीमत घटने का फायदा केवल ग्राहक को न मिलकर सरकार और ऑइल कंपनीज को भी ज्यादा से ज्यादा फायदा हो। 

सरकार पेट्रोल – डीजल की तरह लुब्रिकेंट आयल की दरें भी कम करे। परन्तु पेट्रोलियम कंपनियां और सरकार ने ऐसा नहीं किया। ताकि सरकार और ऑइल कंपनीज दोनों को मोटा मुनाफा हो।