पीएफ सब्सक्राइबर्स को मिलेगा शेयरों में निवेश का फायदा

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नई दिल्ली। ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को जल्द ही इक्विटी इन्वेस्टमेंट के फायदे मिल सकते हैं। रिटायरमेंट फंड मैनेज करने वाली संस्था सरकार के साथ मिलकर एक पॉलिसी को फाइनल कर रही है, जिससे 15 पर्सेंट इन्वेस्टमेंट हर महीने आपको यूनिट्स के तौर पर अलॉट किए जाएंगे।

आप इन्हें प्रॉविडेंट फंड विदड्रॉल या एग्जिट के समय भुना सकते हैं। ईपीएफओ को शेयरों में निवेश से जो सालाना डिविडेंड मिलेगा, वह उसे भी 4.5 करोड़ सब्सक्राइबर्स के बीच बांटेगा। इससे रिटर्न में बढ़ोतरी होगी। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि लेबर मिनिस्ट्री इस पॉलिसी को तैयार कर रही है।

इससे ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स को इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर वास्तविक रिटर्न का पता चलेगा। अभी यह रिटर्न सिर्फ कागज पर होता है। अधिकारी ने बताया, ‘इस पॉलिसी पर संबंधित पक्षों से बातचीत हुई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) से इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसी महीने सीबीटी की मीटिंग हो रही है।’

पॉलिसी फाइनल होने के बाद सब्सक्राइबर्स हर महीने डेट और इक्विटी में अपने निवेश को चेक कर पाएंगे। अधिकारी ने कहा, ‘जब कोई व्यक्ति पीएफ निकालने का फैसला करेगा तो कुल निवेश का 85 पर्सेंट उसे ब्याज समेत वापस किया जाएगा। वहीं, इक्विटी में इन्वेस्टमेंट का 15 पर्सेंट जमा की गई यूनिट्स में उस दिन उसकी वैल्यू से गुना कर लौटाया जाएगा।’

उन्होंने बताया, ‘सब्सक्राइबर के पास इक्विटी इन्वेस्टमेंट विदड्रॉल को एक से दो साल तक टालने का भी ऑप्शन है। यह इस पर निर्भर करेगा कि सीबीटी कितने साल तक यह ऑप्शन देता है।’ वित्त मंत्रालय ने पहले ईपीएफओ के लिए एक नए इन्वेस्टमेंट पैटर्न को मंजूरी दी थी। इससे 5 से 15 पर्सेंट तक फंड इक्विटी या इक्विटी लिंक्ड स्कीम्स में लगाने का रास्ता साफ हुआ था। इसके बाद अगस्त 2015 से ईपीएफओ ने 5 पर्सेंट डिपॉजिट को ईटीएफ में लगाना शुरू किया।

2015-16 में उसने 6,577 करोड़ रुपये इस तरह से लगाए। 2016-17 में यह रकम 14,982 करोड़ रुपये यानी निवेश योग्य रकम का 10 पर्सेंट रही। इस साल इन्वेस्टमेंट लिमिट को बढ़ाकर 15 पर्सेंट कर दिया गया, जो करीब 20,000 करोड़ रुपये है। इस साल मई तक इक्विटी इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न 13.72 पर्सेंट रहा है।

2015 के बाद से हर महीने 85 पर्सेंट प्रॉविडेंट फंड कॉन्ट्रिब्यूशन डेट प्रॉडक्ट्स में, जबकि 15 पर्सेंट इक्विटी में लगाया जा रहा है। हालांकि, हर साल ब्याज कैल्कुलेट करते वक्त इक्विटी वाले हिस्से के असर को शामिल नहीं किया जाता और ना ही आपकी पीएफ बैलेंस शीट में इसे दिखाया जाता है।