माल्या मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार, मिनटों में जमानत

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लंदन। भारत के भगोड़े कारोबारी विजय माल्या को मंगलवार को लंदन में गिरफ्तार कर लिया गया, हालांकि कुछ ही देर में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।

इससे पहले इसी साल अप्रैल में भी माल्या की लंदन में गिरफ्तारी हुई थी और उस बार भी कुछ घंटों में उन्हें जमानत मिल गई थी। डीडी न्यूज के मुताबिक माल्या को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था।

माल्या को मनी लांड्रिंग के एक दूसरे मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसको लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने मामला दर्ज कराया है। ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्युशन सर्विस (सीपीएस) ने यह जानकारी दी। इसके तुरंत बाद माल्या को वेस्टमिन्स्टर मैजिस्ट्रेट की अदालत ने जमानत पर रिहा कर दिया।

विवादों में घिरे 61 वर्षीय व्यवसायी प्रत्यर्पण वॉरंट मामले में पहले से जमानत पर हैं। उन्हें पूर्व की जमानत की शर्तों पर ही रिहा किया गया है। माल्या को 4 दिसंबर को अपने मुकदमे की सुनवाई के लिए अदालत में उपस्थित होना है। अदालत के बाहर बातचीत में माल्या ने कहा कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया।

उन्होंने अपने खिलाफ आरोपों को घेरने की साजिश बताया। माल्या ने कहा, ‘मैं किसी अदालत से बच नहीं रहा हूं। यदि कानूनी तौर पर यहां उपस्थित होना जरूरी है, तो मैं यहां मौजूद रहूंगा। मैंने अपने मामले को साबित करने को कई प्रमाण दिए हैं।

बता दें कि भारत सरकार माल्या के प्रत्यर्पण की कोशिश में लगी हुई है। इसके लिए कानूनी कार्यवाही चल रही है। दरअसल ईडी और सीबीआई की एक टीम कुछ महीने पहले लंदन पहुंची थी और वहां की अदालत में माल्या के खिलाफ सबूत पेश किए गए थे।

मई में सीबीआई और ईडी की 4 सदस्यीय टीम ब्रिटेन पहुंची थी और अधिकारियों को माल्या के खिलाफ कर्ज भुगतान में असफल रहने के मामलों की बारीकी से जानकारी दी थी।

भारतीय बैंकों की 9 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी का सामना कर रहे माल्या देश छोड़कर काफी वक्त से लंदन में रह रहे हैं। माल्या पर कई दूसरे गंभीर वित्तीय आरोप भी लगे हुए हैं।

किंगफिशर एयरलाइंस पर करीब 9000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। यह कर्ज एसबीआई की अगुवाई वाले 17 बैंकों के समूह ने दिया था। पिछले साल मार्च में माल्या भारत से निकल गए थे। माल्या दो मार्च 2016 को भारत से ब्रिटेन चले गए थे।

सीबीआई ने उनके खिलाफ दो मामले दर्ज किए हैं। एक तो आईडीबीआई बैंक से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले समूह की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है।