जीएसटी के बाद देर से आ रहा केंद्र से पैसा, टैक्स भी कम

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महीने की पहली तारीख को मिलता था केंद्रीय करों के बदले हिस्सा , मिलेगा 1100 करोड़ का मुआवजा

जयपुर। जीएसटीसे राज्य सरकार का सिर्फ टैक्स कम हुआ है बल्कि इसकी वजह से राज्य सरकार को केंद्रीय करों में हिस्से के तौर पर मिलने वाली रकम भी अब देरी से मिल रही है। केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर राज्य सरकार को हर महीने करीब ढाई हजार करोड़ रुपए मिलते हैं।

अब तक यह रकम उसे हर महीने की एक तारीख को मिल जाती थी जिससे कर्मचारियों की तनख्वाह निकल जाती थी। लेकिन अब यह पैसा उसे महीने की 15 तारीख को मिल रहा है। दरअसल केंद्र सरकार ने जीएसटी में रिटर्न के लिए 20 तारीख तय कर रखी है।

इसके चलते ही राज्यों को केंद्रीय करों में मिलने वाले पैसे में देरी हो रही है। वित्त विभाग का कहना है कि हाल में आरबीआई के साथ हुई बैठक में उन्हाेंने यह मुद्दा उठाया भी था। केंद्र से पैसा देरी से मिलने के चलते प्रदेश की खर्च पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है।

वित्त विभाग का कहना है कि केंद्र से पैसा देरी से मिलने की वजह से राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सभी तरह की ग्रांट्स और सहायता में भी उतनी ही देरी हो रही है।  जीएसटी लागू होने से पहले राज्य सरकार को वैट से हर सप्ताह राजस्व मिल रहा था।

राज्य सरकार को अगस्त में कुल 2364 करोड़ रुपए का टैक्स मिला है। इसमें एसजीएसटी से 803 करोड़, अाईजीएसटी से 404 करोड़ और वैट से 1157 करोड़ रुपए मिले हैं। जीएसटी लागू होने से पहले अप्रेल में राज्य सरकार को लगभग 2460 करोड़ रुपए टैक्स मिला था।

इस लिहाज से जीएसटी से सरकार का टैक्स करीब 100 करोड़ रुपए कम रहा है। जीएसटी से अगस्त और सितंबर में मिलाकर राज्य सरकार को 3716 करोड़ रुपए का टैक्स मिला तय हुआ है। इस लिहाज से हर माह का लक्ष्य करीब 1800 करोड़ रुपए हैं।

लेकिन लक्ष्य के अनुरूप टैक्स नहीं आने से कम टैक्स रहने पर बची हुई रकम केंद्र सरकार मुआवजे के रूप में राज्य सरकार को देगी। इसके लिए 4 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की बैठक होने जा रही है। अनुमान के मुताबिक राज्य सरकार को जीएसटी के पेटे करीब 1100 करोड़ रुपए का मुआवजा मिल सकता है।