जीएसटी रजिस्ट्रेशन में अब डेटा संशोधन हुआ आसान

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नई दिल्ली। गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) ने बुधवार को कॉमन पोर्टल पर जीएसटी रजिस्ट्रेशन में संशोधन की सुविधा दे दी, जिसका ट्रेड इंडस्ट्री को तीन महीने से इंतजार था।

बिजनस डीटेल, प्लेस ऑफ बिजनस, पार्टनर्स डीटेल सहित कई अमेंडमेंट टैब ऐक्टिवेट कर दिए गए हैं, जहां कोई भी असेसी अपना डेटा संशोधित कर सकता है या नए सिरे से भर सकता है।

अभी तक देशभर से शिकायतें आ रही थीं कि अगर कारोबारी ने अपने रजिस्ट्रेशन में कोई गलती कर दी है या बिजनस प्लेस, ट्रेडिंग कमोडिटी, प्रमोटर या पार्टनर, दूसरी दुकान या ब्रांच के बारे में कोई नई सूचना जोड़ना चाहता है तो वह इसे अमेंड नहीं कर सकता था।

इसके चलते बड़ी संख्या में ट्रेडर्स ने टैक्स या रिटर्न भरने की पहल ही नहीं की थी, लेकिन सबसे ज्यादा परेशान वे थे, जिन्होंने पुराने टैक्स रिजीम के रजिस्ट्रेशन के आधार पर माइग्रेट तो कर लिया लेकिन बेसिक इन्फर्मेशन में कई सूचनाएं पुरानी रह गईं थीं।

जीएसटीएन एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि अमेंडमेंट की इजाजत सिर्फ तकनीकी वजह से नहीं रुकी थी, बल्कि इसमें कुछ वैधानिक पेंच थे, जिन्हें जीएसटी काउंसिल की हालिया बैठक में सुलझा लिया गया था। ओनरशिप और पैन नंबर को छोड़कर बाकी बेसिक अमेंडमेंट अब तकनीकी रूप से ऐक्टिवेट किया जा रहा है।

नई टैक्स रिजीम में माइग्रेट होने वाली कई फर्मों को अब प्लेस ऑफ सप्लाई को लेकर अपनी जगह बदलनी पड़ी है, वहीं पैन आधारित रजिस्ट्रेशन के चलते कई लोगों ने एक ही नाम से दो या तीन फर्में रजिस्टर्ड करा ली हैं, लेकिन अब अलग-अलग रजिस्ट्रेशन लेना चाहते हैं।

आने वाले समय में असेसीज की डिमांड के आधार पर और भी सहूलियतें शुरू की जा सकती हैं। जीएसटी एक्सपर्ट सुधीर हालाखंडी ने बताया , ‘यह एक बड़ी राहत है।

जो सुविधा 1 जुलाई को मिल जानी चाहिए थी, वह आज मिल रही है। इससे काफी लोग परेशान थे। अब कोई भी अपने रजिस्ट्रेशन में संशोधन कर सकता है।’

हालांकि इंडस्ट्री की तरफ से ऐसी शिकायतें भी आ रही हैं कि पोर्टल पर अब तक कई फॉर्म उपलब्ध नहीं हैं, जिनसे जुड़ी डेडलाइन करीब आ रही है या ट्रेडर्स को नुकसान हो रहा है। मसलन, जिन लोगों ने गलती से कंपोजिशन स्कीम ऑप्ट कर ली और अब बाहर निकलना चाहते हैं, उनके लिए सीएमपी-4 की सुविधा अभी तक पोर्टल पर शुरू नहीं हुई है।

अधिकारियों का कहना है कि जुलाई के जीएसटीआर-1 फाइलिंग में तेजी आ रही है और 10 अक्टूबर की डेडलाइन के मद्देनजर नेटवर्क पीक लोड के लिए तैयार है। थ्री-बी की फाइलिंग में आई शिकायतों को ध्यान में रखकर भी तकनीकी चीजें दुरुस्त की जा रही हैं।