डॉलर के मुकाबले और मजबूत होगा रुपया: सर्वे

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एफपीआई और एफडीआई बढ़ने से आनेवाली तिमाहियों में डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती जारी रह सकती है

मुंबई। विदेशी निवेश बढ़ने से मार्च 2018 तक डॉलर के मुकाबले रुपये में और 3-4 पर्सेंट की मजबूती आ सकती है, लेकिन अगर अमेरिकी सेंट्रल बैंक क्वॉन्टिटेटिव ईजिंग यानी फाइनैंशल सिस्टम में अधिक कैश बनाए रखने की पॉलिसी बदलता है तो रुपये की चाल बदल सकती है।

डॉलर के मुकाबले रुपया 61 के लेवल तक जा सकता है। उनका मानना है कि शेयर बाजार के महंगा होने और कंपनियों की प्रॉफिट ग्रोथ कमजोर होने से विदेशी निवेशक अपना पैसा निकाल सकते हैं।

इन जानकारों का कहना है कि ग्लोबल फाइनैंशल मार्केट्स में खलबली मचने पर ऐसा हो सकता है। दूसरी तरफ, विदेशी संस्थागत निवेशक भारत के बॉन्ड मार्केट में अधिकतम सीमा तक निवेश कर चुके हैं।

आनंद राठी सिक्यॉरिटीज के चीफ इकॉनमिस्ट सुजन हाजरा ने बताया, ‘अगर वैश्विक बाजार में कैश कम होता है तो इसका रुपये की चाल पर असर पड़ सकता है।

ऐसा होने पर भारत सहित इमर्जिंग मार्केट्स से विदेशी निवेशक पैसा निकालेंगे।’ उन्होंने बताया, ‘अगर अमेरिका में मैक्रो इकनॉमिक डेटा बेहतर होते हैं और वहां की अर्थव्यवस्था सामान्य होती है तो इससे इन्वेस्टर्स दूसरी जगहों से पैसा निकालकर डॉलर में निवेश बढ़ाएंगे।

इसका ग्लोबल लिक्विडिटी (कैश) पर बुरा असर पड़ेगा।’ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 400 अरब डॉलर पहुंच गया है। इससे देश से अचानक विदेशी निवेशकों के पैसा निकालने की चुनौती से निपटने में मदद मिलेगी।

हालांकि, अप्रैल-जून 2017 तिमाही में देश का करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़कर जीडीपी के 2.4 पर्सेंट पर पहुंच गया, जो एक साल पहले की इसी तिमाही में 0.1 पर्सेंट था।

चालू खाता घाटा बढ़ने पर आमतौर पर रुपये में कमजोरी आती है। मुद्रा बाजार को लग रहा है कि रुपये में मजबूती को रोकने के लिए रिजर्व बैंक दखल दे सकता है।

400 अरब डॉलर के विदेशी भंडार की वजह से रुपये में मजबूती रोकने के लिए वह बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ा सकता है। दरअसल, रुपये में मजबूती की वजह से देश के निर्यातकों को दिक्कत हो रही है।

इससे मोदी सरकार के फ्लैगशिप प्रोग्राम ‘मेक इन इंडिया’ पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इस बारे में बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंट्री-ट्रेजरर जयेश मेहता ने बताया, ‘आम धारणा यह है कि विदेशी निवेश बढ़ने से रुपये में मजबूती आएगी।

एफपीआई और एफडीआई बढ़ने से आनेवाली तिमाहियों में डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती जारी रह सकती है। करंसी मार्केट में आरबीआई समय-समय पर दखल दे रहा है।

वह करंसी मार्केट में उतार-चढ़ाव को कम करने के लिए ऐसा कर रहा है।’ इस साल एफपीआई ने अब तक 1.74 लाख करोड़ का निवेश किया है। उन्होंने बॉन्ड मार्केट में ज्यादा पैसा लगाया है।